॥ मात श्री नर्मदे हर ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ ॥ श्री राधाकृष्णाय नमः ॥
भोजन, निवास, प्रवास, स्थानीय भ्रमण आदि समस्त शुल्क सम्मिलित।
संगीतमय आध्यात्मिक नर्मदा परिक्रमा की अपार सफलता के पश्चात कैवल्यधाम आश्रम द्वारा पावन तपोभूमि नैमिषारण्य में श्रीमद् भागवत कथा एवं दिव्य तीर्थ काशी, प्रयागराज, अयोध्या की यात्रा का अनूठा आयोजन किया जा रहा है।
काशी, प्रयागराज, अयोध्या जैसे महातीर्थों के दर्शन, साथ ही नैमिषारण्य तीर्थ में “श्रीमद् भागवत कथा” श्रवण का अत्यधिक महत्व है। प्रसिद्ध पुराणाचार्य पं. अनन्त रेवाशिष जी, जो कि "नर्मदा पुराण" के भी प्रख्यात प्रवक्ता हैं, के मुखारविन्द से "श्रीमद् भागवत महापुराण" श्रवण करना एक विलक्षण अनुभूति है। साथ में उत्तम संगीत संयोजन इसे और रसपूर्ण बनाता है।
नैमिषारण्य तीर्थ में ही वेदमहर्षि व्यास जी ने पुराणों की रचना की थी। उन्हीं वेदव्यास जी की प्रमुख गादी के निकट ही पुराणों का श्रवण जीवन को धन्य बनाता है। नैमिषारण्य वह स्थान है, जहाँ पुराण प्रवक्ता लोमहर्षक सूत जी ने शौनकादि 88 हजार ऋषि मुनियों को सभी पुराणों की कथा सुनाई थी। ऐसे स्थान पर श्री भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तित करने वाला दिव्य अनुष्ठान है।
श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से मन में सकारात्मकता, उत्साह, करुणा, सेवा के भाव जागृत होते हैं। तो आइये, योग योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र की दिव्य कथा उसी स्थान पर श्रवण करने का लाभ उठाएं, जहाँ यह सर्वप्रथम कही गई।
दि. 25-10-26 :- वाराणसी (काशी) में एकत्रीकरण, नाव द्वारा सायंकालीन माँ गंगा महाआरती दर्शन, काशी विश्वनाथ दर्शन।
दि. 26-10-26 :- काशी दर्शन, गंगा स्नान, बाजार खरीदारी समय।
दि. 27-10-26 :- तीर्थराज प्रयाग में त्रिवेणी संगम स्नान (गंगा, यमुना, सरस्वती), अक्षय वट, पातालेश्वर मंदिर, बड़े हनुमान दर्शन, रात्रि विश्राम अयोध्या।
दि. 28-10-26 :- अयोध्या दर्शन, रात्रि विश्राम नैमिषारण्य।
दि. 29-10-26 :- कलश यात्रा एवं श्रीमद् भागवत कथा का श्री गणेश।
दि. 30-10-26 :- श्रीमद् भागवत कथा (द्वितीय दिवस) एवं नैमिषारण्य क्षेत्र दर्शन।
दि. 31-10-26 :- श्रीमद् भागवत कथा (तृतीय दिवस), नैमिषारण्य 84 कोस यात्रा।
दि. 1-11-26 :- श्रीमद् भागवत कथा (चतुर्थ दिवस), नैमिषारण्य 84 कोस यात्रा।
दि. 2-11-26 :- श्रीमद् भागवत कथा (पंचम दिवस), नैमिषारण्य 84 कोस यात्रा।
दि. 3-11-26 :- श्रीमद् भागवत कथा (षष्ठम दिवस), कथा दो सत्रों में।
दि. 4-11-26 :- कथा समापन, हवन एवं लगभग 1 बजे यात्रा विसर्जन, लखनऊ हेतु प्रस्थान।
वाराणसी – गंगा आरती (दशाश्वमेध घाट), नाव द्वारा लगभग 15 घाटों के दर्शन, काशी विश्वनाथ दर्शन, अन्नपूर्णा मंदिर, काल भैरव, संकट मोचन मंदिर, दुर्गा मंदिर, कोड़ी माता, तुलसी मानस मंदिर, बिर्ला मंदिर (बी. एच. यू.), भारत माता मंदिर, बनारसी साड़ी खरीदारी।
प्रयाग राज – त्रिवेणी संगम स्नान, बड़े हनुमान, अक्षय वट, पातालेश्वर मंदिर।
अयोध्या – राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमान गढ़ी, सरयू घाट, कनक भवन, दशरथ महल, सीता की रसोई।
नैमिषारण्य दर्शन – चक्रतीर्थ, गोमती घाट, मनुशतरूपा तपोभूमि, व्यास गादी, सूत गादी, ललितादेवी मंदिर, भूतेश्वर, हनुमान गढ़ी, तिरुपति बालाजी मंदिर, पुराण मंदिर, नारदानंद आश्रम, आपानारायण स्वामी आश्रम, बाबा विश्वनाथ मंदिर (छोटी काशी), मृत्युंजय सिद्धपीठ, कालीपीठ आश्रम आदि प्रमुख स्थान।
3 दिवसीय 84 कोस यात्रा के अंतर्गत दर्शनीय तीर्थस्थल–
द्रारकाधीश मंदिर, दधीचि कुंड, वराह कूप, कुमनेश्वर, कुकरी तीर्थ, कोटि तीर्थ, सूर्य कुंड, कोटेश्वर महादेव, कैलाश महादेव, प्रभाकर तीर्थ, हत्याहरण तीर्थ, धौतपाप तीर्थ, नर्मदेश्वर, तुंबुरु नारायण, दश कन्या तीर्थ, सूर्यकुंड, हरिहर क्षेत्र, विष्णु आवर्त, रुद्रावर्त और भी अनेक तीर्थ क्षेत्र।
काशी (बनारस) से नैमिषारण्य की यात्रा ए.सी. सुपर लग्जरी अवानिया वाहन के माध्यम से सम्पन्न होगी।
नैमिषारण्य की तीन दिवसीय 84 कोस परिक्रमा ए.सी. फोर व्हीलर अथवा ए.सी. ट्रैवलर के माध्यम से सम्पन्न होगी।
काशी, अयोध्या, नैमिषारण्य आदि के स्थानीय दर्शन रिक्शा आदि के द्वारा सम्पन्न होंगे।
जहाँ तक अनुमति होगी, वाहन वहीं तक जाएंगे।
प्रतिदिन 1.5 से 2 कि.मी. पैदल चलने की मानसिक एवं शारीरिक तैयारी के साथ यात्रा में पधारें।
काशी विश्वनाथ दर्शन के पश्चात होटल तक आने की व्यवस्था यात्री स्वयं करेंगे।
अयोध्या, काशी आदि मंदिरों में व्हील चेयर, सुगम दर्शन शुल्क आदि यात्री वहन करेंगे।
यात्रा एवं कथाकाल में सर्वत्र 2 भक्तों के लिए 1 ए.सी. डबल बेड अटैच सुविधा युक्त कमरे की व्यवस्था रहेगी।
यात्रा प्रारम्भ होने से पहले वाराणसी में निवास एवं नैमिषारण्य में कथा समापन के पश्चात नैमिषारण्य अथवा लखनऊ में निवास के समस्त व्यय यात्री स्वयं वहन करेंगे।
प्रथम तल (फर्स्ट फ्लोर) तक चढ़ने-उतरने की मानसिकता के साथ पधारें।
कथा काल में प्रतिदिन बालकृष्ण भगवान को षोडशोपचार पूजन होगा, जो प्रत्येक भक्त व्यक्तिगत रुप से करेगा।
कथा काल में पूजन में प्रयुक्त होने वाली समस्त पूजन सामग्री आयोजकों द्वारा प्रदान की जावेगी।
प्रत्येक भक्त व्यक्तिगत रुप से अथवा जोड़े से बालकृष्ण भगवान का पूजन करेगा। इसलिये कथा यात्रा में पधारते समय स्वयं के पूजन गृह में स्थित बालकृष्ण भगवान की प्रतिमा लेकर पधारें। जोड़े में एक प्रतिमा स्वीकार्य है।
कथा एवं पूजन काल में पुरुषों और महिलाओं को भारतीय पोषाख धारण करना अनिवार्य है।
कथा श्रवण, षोडशोपचार पूजन, हवन आदि विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए 2101/- रु. दक्षिणा (प्रतिव्यक्ति) यात्रा शुल्क के अतिरिक्त देना होगी।
यात्रा में दोनों समय शुद्ध-सात्विक-स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी, जिसमें समयानुसार मिष्ठान का समावेश रहेगा।
कथा सत्र के दौरान (7 दिवस) भोजन में प्याज एवं लहसुन का प्रयोग नहीं होगा।
प्रातःकाल नाश्ता (बालभोग) एवं दो समय चाय/कॉफी की व्यवस्था (वेंडिंग मशीन द्वारा) रहेगी।
एकादशी एवं संकष्टी चतुर्थी के उपवासिक भोजन की व्यवस्था रहेगी। व्यक्तिगत एवं सामूहिक उपवास की व्यवस्था नहीं रहेगी। उपवास के दिन प्रातः नाश्ते की व्यवस्था नहीं रहेगी।
समय पर भोजन प्रसादी की व्यवस्था के लिए अलग भोजन वाहन (पेन्ट्री कार) की व्यवस्था रहेगी।
सम्पूर्ण यात्रा काल में प्रतिदिन 2 लीटर बोतलबंद आर.ओ. शुद्धीकृत पेयजल प्रदान किया जाएगा।
कथा काल में आर.ओ. पेयजल की व्यवस्था रहेगी।
कम से कम सामान के साथ यात्रा करके अधिक से अधिक आनंद प्राप्त करें।
प्रति व्यक्ति 1 बड़ा सूटकेस अथवा बैग (वजन 18 कि.ग्रा. तक) ही मान्य होगा, जिसका परिवहन सेवकों के माध्यम होगा।
अतिरिक्त सामान का परिवहन यात्री स्वयं करेंगे।
मूल्यवान आभूषण, वस्तुएँ स्वयं के उत्तरदायित्व पर साथ में लावें।
यात्री अपने शारीरिक स्वास्थ्य एवं पथ्य परहेज का स्वयं ध्यान रखेंगे। नियमित औषधियाँ पर्याप्त मात्रा में साथ में रखें।
प्राथमिक उपचार की सुविधा रहेगी। स्वास्थ्य अधिक खराब होने की स्थिति में परिजनों को सूचना देकर उचित निर्णय लिया जायेगा।
यात्रा प्रारंभ होते समय यात्री अपने साथ शासन प्रमाणित परिचय पत्र (आधार कार्ड आदि) साथ में रखें। एक पासपोर्ट आकार का फोटो भी साथ में रखें।
घाटों पर स्नान करते समय सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
तत्कालीन अपरिहार्य परिस्थिति के कारण कार्यक्रम में परिवर्तन का अधिकार आयोजकों के पास सुरक्षित है।
कथा यात्रा प्रारंभ होने से 15 दिवस पहले सहभागियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जायेगा, जिसमें और अधिक विस्तृत विवरण दिया जायेगा।
सभी विवादों का न्यायक्षेत्र बड़वाह रहेगा।
यात्रा राशि में भोजन, निवास, पूजन सामग्री व स्थानीय भ्रमण (काशी विश्वनाथ मंदिर से लौटने की व्यवस्था को छोड़कर) आदि समस्त शुल्क सम्मिलित हैं।
आरक्षण के समय रु. 15,000/- प्रति व्यक्ति जमा करके अपना स्थान सुनिश्चित करें।
आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने से 60 दिन पहले प्रति व्यक्ति 15,000/- रुपये जमा करें। शेष राशि यात्रा प्रारंभ होते समय जमा करें।
वाराणसी तक आने की एवं लखनऊ से वापसी का समस्त व्यय यात्री स्वयं वहन करेंगे।
आरक्षण राशि जमा करने पर यात्री को सभी सुविधा और नियम ज्ञात एवं मान्य हैं, ऐसा माना जाएगा।
कृपया किसी प्रकार की छूट अथवा डिस्काउंट की चर्चा न करें।
आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने के 90 अथवा अधिक दिन पहले आरक्षण निरस्त करने पर प्रति व्यक्ति रु. 3000/- काटकर शेष राशि वापस लौटा दी जायेगी।
आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने के 60 से 90 दिवस के मध्य यात्रा निरस्त करने पर रु. 10,000/- काटकर शेष राशि वापस लौटाई जायेगी।
आपके द्वारा चयनित यात्रा प्रारंभ होने के 30 से 59 दिवस के मध्य यात्रा निरस्त करने पर कुल यात्रा राशि का 15,000/- काटकर शेष राशि वापस लौटाई जायेगी।
यात्रा प्रारंभ होने में 30 दिन शेष रहने पर कोई राशि नहीं लौटाई जा सकेगी।
बताई गई समय सीमा में यात्रा राशि जमा न करने पर आरक्षण स्वतः निरस्त माना जायेगा एवं नियमानुसार राशि काटकर शेष राशि लौटा दी जायेगी।
यात्रा प्रारंभ होने के पश्चात किसी कारणवश बीच में यात्रा छोड़ने पर कोई राशि वापस नहीं लौटाई जायेगी।
किन्हीं अपरिहार्य कारणों से आरक्षण निरस्त करने पर अन्य यात्री को अपने स्थान पर भेज सकते हैं।
आरक्षण निरस्त होने पर यात्रा राशि अन्य यात्राओं में समायोजित नहीं होगी।
लॉकडाउन, कर्फ्यू, युद्ध, प्राकृतिक आपदा अथवा शासकीय प्रतिबंध की स्थिति में यात्रा निरस्त होने पर जमा राशि वापस (रिफंड) न करते हुए भविष्य की यात्रा में समायोजित होगी।
वर्तमान युद्धजन्य परिस्थिति को देखते हुए डीजल अथवा ईंधन के भाव में अप्रत्याशित वृद्धि होने पर यात्रा राशि में आंशिक वृद्धि संभव है।
यह कैंसलेशन प्रक्रिया ध्यान से पढ़ें, इसका अक्षरशः पालन किया जायेगा। बाद में किसी प्रकार का विवाद मान्य नहीं होगा।
॥ maat shri Narmade har ॥ ॥ Om Namo Bhagavate Vasudevaya ॥ ॥ Jai Shri Radha-Krishna ॥
"A spiritually enriching journey through the timeless sacred landscapes of Varanasi, Prayagraj, Ayodhya, and Naimisharanya, offering devotees the opportunity to experience divine temples, holy rivers, ancient legends, and the revered 84-Kos Parikrama. and the most :- divya musical Shrimad Bhagwat Katha"
includes :- accommodation, meals, transportation, local sightseeing, and all related travel arrangements.
After the tremendous success of the Aadhyatmik Narmada Parikrama, Kaivalya Dham Ashram is organizing a unique pilgrimage to the sacred land of Naimisharanya, featuring the recitation of the Shrimad Bhagavata Katha along with visits to the divine holy cities of Kashi (Varanasi), Prayagraj, and Ayodhya.
A pilgrimage to these great sacred destinations, combined with Shrimad Bhagavata Katha at Naimisharanya, holds immense spiritual significance. The discourse will be delivered by Pt. Anay Revashish Ji, a renowned exponent of the Narmada Purana. Listening to the sacred Bhagavata Purana through his eloquent narration, enriched with soulful devotional music, promises a deeply uplifting and memorable experience.
Naimisharanya is the holy land where the great sage maharshi Veda Vyasa composed the Puranas. Listening to these sacred scriptures near the Tapobhumi of Maharishi Ved Vyasa is considered highly auspicious and spiritually rewarding. It was here that Suta Maharishi (Lomaharshana Suta) narrated the Purana to the 88,000 sages led by Rishi Shaunaka. Thus, a Shrimad Bhagavata Katha at this sacred site is not merely a religious event but a transformative spiritual journey.
The recitation of the Shrimad Bhagavata Katha inspires positivity, enthusiasm, compassion, and a spirit of selfless service in the hearts of devotees. We warmly invite you to experience the divine life and teachings of Lord Shri Krishna, the Supreme Yogi, by listening to His sacred story at the very place where it was first narrated.
25 October 2026 :- Arrival and gathering at Varanasi (Kashi). Evening boat ride to witness the grand Ganga Aarti at Dashaswamedha ghat. Darshan of Kashi Vishwanath Temple. Overnight stay in kashi.
26 October 2026 :- Sightseeing in Kashi. Holy bath in the maa Ganga. Precious time for local shopping.
27 October 2026 :- Visit to Prayagraj (Tirthraj Prayag). Holy dip (snan) at the Triveni Sangam (meeting point of the holy Ganga, Yamuna, Saraswati rivers). darshan, Overnight stay in Ayodhya.
28 October 2026 :- Ayodhya darshan, Overnight stay at Naimisharanya.
29 October 2026 :- Sacred Kalash Yatra followed by Ceremonial commencement of the Shrimad Bhagavat Katha.
30 October 2026 :- Second day of the Shrimad Bhagavat Katha. Sightseeing of the sacred sites of Naimisharanya.
31 October 2026 :- Third day of the Shrimad Bhagavat Katha. Pilgrimage through the 84-Kos Parikrama of Naimisharanya.
1 November 2026 :- Fourth day of the Shrimad Bhagavat Katha. Continuation of the 84-Kos Naimisharanya pilgrimage.
2 November 2026 :-Fifth day of the Shrimad Bhagavat Katha. Continuation of the 84-Kos Naimisharanya pilgrimage.
3 November 2026 :- Sixth day of the Shrimad Bhagavat Katha. The discourse will be conducted in two sessions.
4 November 2026 :- Conclusion of the Shrimad Bhagavat Katha. Followed by Sacred Havan yadnya. Around 1:00 PM, the yatra concludes, followed by departure towards Lucknow.
Varanasi (Kashi) :- magnificent Ganga Aarti at Dashashwamedh Ghat. Boat ride offering views of around 15 sacred ghats. Kashi Vishwanath Temple,Annapurna Temple, Kal Bhairav Temple, Sankat Mochan Hanuman Temple, Durga Temple, Kaudi Mata Temple, Tulsi Manas Temple, Birla Temple (BHU campus ), Bharat Mata Temple, Time for shopping for the famous Banarasi silk sarees.
Prayagraj :- Holy bath at the sacred Triveni Sangam, Bade Hanuman Temple, Akshay Vat, Pataleshwar Temple.
Ayodhya :- Shri Ram Janmabhoomi Temple, Hanuman Garhi, Saryu Ghat, Kanak Bhavan, Dasharath Mahal, Sita Ki Rasoi.
Naimisharanya :- Chakratirth, Gomti Ghat, Manu-Shatarupa Tapobhoomi, Vyas Gaddi, Suta Gaddi, Lalita Devi Temple, Bhuteshwar Temple, Hanuman Garhi, Tirupati Balaji Temple, Puran Mandir, Naradanand Ashram, Aapa Narayan Swami Ashram, Baba Vishwanath Temple (Chhoti Kashi), Mrityunjaya Siddhapeeth, Kaali peeth Ashram and several other prominent sacred sites.
Sacred Sites Included in the 3-Day 84-Kos Parikrama :- Dwarkadhish Temple, Dadhichi Kund, Varaha Koop, Kumneshwar, Kukri Tirth, Koti Tirth, Surya Kund, Koteshwar Mahadev, Kailash Mahadev, Prabhakar Tirth, Hatyaharan Tirth, Dhautpaap Tirth, Narmadeshwar, Tumburu Narayan, Dash Kanya Tirth, Surya Kund, Harihar Kshetra. Vishnu Avart, Rudravart. Along with many other revered pilgrimage sites.
The journey from Varanasi (Kashi) to Naimisharanya will be conducted in a luxury air-conditioned urbaniya coach.
The three-day 84-Kos Parikrama of Naimisharanya will be completed using air-conditioned four-wheelers or AC Traveller vehicles.
Local sightseeing in Varanasi, Ayodhya, Naimisharanya, and other places will be arranged by rickshaws and similar local transport.
Vehicles will travel only up to locations where access is permitted.
Pilgrims are requested to come prepared, both physically and mentally, to walk approximately 1.5 to 2 kilometres each day.
After the darshan of Kashi Vishwanath Temple, participants will need to make their own arrangements to return to the hotel.
Expenses for wheelchairs, priority/special darshan, and similar facilities at the temples in Ayodhya, Varanasi, and other places will be borne by the pilgrims themselves.
Throughout the pilgrimage and the Bhagavata Katha programme, accommodation will be provided in air-conditioned, attached-bath double-bed rooms on a twin-sharing basis (two devotees per room).
Participants will bear the entire cost of accommodation before the commencement of the tour in Varanasi and after the conclusion of the Katha yatra at either Naimisharanya or Lucknow.
Pilgrims are requested to be prepared to climbing up to the first floor where necessary.
During the period of the Shrimad Bhagavat Katha, Lord Bal Krishna will be worshipped daily through the Shodashopachara Pujan. Each devotee will perform the worship personally.
All the pujan samagri required for the daily worship during the Katha will be provided by the organisers.
Each devotee may perform the worship individually or as a couple. Therefore, participants are requested to bring the idol of Lord Bal Krishna from their home . One idol per couple is acceptable.
During the Katha and worship ceremonies, it is mandatory for both men and women to wear traditional Indian attire.
For participation in the Katha, Shodashopachara Puja, Havan and other religious ceremonies, a Dakshina ₹2,101/- per person will be payable in addition to the tour charges.
Pure, sattvic (vegetarian), and delicious meals will be provided twice daily throughout the journey, including timely sweets as per the schedule.
During the 7-day discourse (Katha) sessions, onions and garlic will not be used in the preparation of food.
Morning breakfast (Balbhog) and tea/coffee twice a day (through vending machines) will be available
Special fasting meals will be arranged on Ekadashi and Sankashti Chaturthi. Individual or group fasting arrangements will not be provided.
Breakfast will not be served on fasting days.
A separate pantry car will be arranged to ensure timely distribution of meals (Prasadi).
During the entire journey, each traveler will be provided with 2 liters of bottled RO-purified drinking water daily.
During the Katha period, RO-purified drinking water will be available.
Travel with minimal luggage to enjoy the journey to the fullest.
Only one large suitcase or bag per person (up to 18 kg) will be permitted. Its transportation will be arranged through the volunteers.
Passengers will be responsible for carrying any additional luggage themselves.
Bring valuable jewelry and belongings at your own responsibility.
Travelers should take care of their own health and dietary restrictions.
Please carry an adequate quantity of regular medicine's.
Basic first-aid facilities will be available. In case of serious health issues, family members will be informed and appropriate decisions will be taken accordingly.
At the commencement of the journey, travelers must carry a valid government-issued identity proof (such as an Aadhaar Card etc).
Please also carry one passport-sized photograph.
Follow all safety instructions while bathing at the ghats.
The organizers reserve the right to make changes to the program due to unavoidable circumstances.
A WhatsApp group for all participants will be created 15 days before the commencement of the Katha Yatra, where more detailed information will be shared.
All disputes shall be subject to the jurisdiction of Barwaha.
The tour cost includes all charges for travelling, meals, accommodation, pujan samagri and local sightseeing (except the return arrangement from the Kashi Vishwanath Temple).
To confirm your reservation, deposit ₹15,000 per person at the time of booking.
Deposit an additional ₹15,000 per person at least 60 days before the commencement of your selected tour.
The remaining balance must be paid at the starting date of the journey.
All expenses for traveling to Varanasi and returning from Lucknow will be borne by the traveler.
By depositing the reservation amount, it will be deemed that the traveler is fully aware of and agrees to all facilities, terms, and conditions of the tour.
Kindly refrain from requesting or discussing any type of concession, discount, or special price reduction.
If you cancel your reservation 90 days or more before the start of the selected tour, ₹3,000 per person will be deducted, and the remaining amount will be refunded.
If you cancel your tour between 60 and 90 days before the start date, ₹10,000 per person will be deducted, and the remaining amount will be refunded.
If you cancel your tour between 30 and 59 days before the start date, ₹15,000 per person will be deducted from the total tour cost, and the remaining amount will be refunded.
No refund will be provided if the cancellation is made within 30 days of the tour start date.
If the tour balance amount is not paid within the prescribed time limit, the reservation will be considered automatically cancelled, and the
refund (after applicable deductions) will be processed according to the policy.
If a traveler leaves the tour midway for any reason after the tour has commenced, no refund will be granted.
In unavoidable circumstances requiring cancellation, you may provide other traveler to participate in your place.
Amounts from cancelled reservations cannot be adjusted against any other tours.
In case of a tour cancellation due to lockdown, curfew, war, natural disaster, or government restrictions, the deposited amount will not be refunded but will be adjusted toward any future tour's.
Considering the current war-related global situation, if there is an unexpected increase in diesel or fuel prices, a partial increase in the tour cost may be applicable.
Please read this cancellation policy carefully. It will be implemented strictly as stated, and no disputes or objections will be entertained later.
॥ मात श्री नर्मदे हर ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ ॥ जय श्री राधाकृष्ण ॥
निवास, भोजन, प्रवास व्यवस्था, स्थानिक तीर्थदर्शन पूजन सामग्री यांचा समावेश.
आध्यात्मिक नर्मदा परिक्रमेच्या अभूतपूर्व यशानंतर कैवल्यधाम आश्रमातर्फे पावन तपोभूमी नैमिषारण्यात श्रीमद्भागवत कथेचे आयोजन तसेच काशी, प्रयागराज आणि अयोध्या या दिव्य तीर्थक्षेत्रांची पवित्र यात्रा आयोजित करण्यात आली आहे.
काशी, प्रयागराज आणि अयोध्या आदी महातीर्थ क्षेत्रांच्या दर्शनासह नैमिषारण्यात श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करण्याचे अनन्यसाधारण आध्यात्मिक महत्त्व आहे. ही दिव्य कथा नर्मदापुराणाचे प्रख्यात प्रवचनकार पं. अनय रेवाशीषजी यांच्या श्रीमुखातून सादर होणार आहे. त्यांच्या मधुर व ओजस्वी वाणीतील भागवत कथेला भक्तिमय संगीताची साथ लाभल्याने प्रत्येक भक्तासाठी हा अनुभव अविस्मरणीय आणि चैतन्यमय ठरेल.
नैमिषारण्य ही ती पावन भूमी आहे, जिथे महर्षी वेदव्यासांनी पुराणांची रचना केली. महर्षी वेदव्यासांच्या तपोभूमीजवळ या दिव्य पुराणांचे श्रवण करणे अत्यंत पुण्यदायी आणि कल्याणकारी मानले जाते. याच पवित्र स्थळी आदी पुराण प्रवक्ता सूत महाराज (लोमहर्षण सूत) यांनी शौनकादी 88 हजार ऋषींना पुराणकथांचे श्रवण घडविले होते. त्यामुळे या भूमीवर होणारी श्रीमद्भागवत कथा ही केवळ धार्मिक कार्यक्रम नसून एक दिव्य आध्यात्मिक अनुभूती आहे.
श्रीमद्भागवत कथाश्रवणामुळे भक्तांच्या अंतःकरणात सकारात्मकता, उत्साह, करुणा, भक्तीभाव आणि परोपकाराची प्रेरणा जागृत होते. योगेश्वर भगवान श्रीकृष्णांचे दिव्य चरित्र आणि जीवनदर्शन, ज्या पवित्र भूमीवर प्रथम कथन झाले, त्याच भूमीत श्रवण करण्याची ही एक अद्वितीय संधी आहे.
आपण सर्वांनी या अलौकिक आध्यात्मिक यात्रेत सहभागी होऊन भक्ती, ज्ञान, वैराग्य आणि सनातन धर्माच्या चिरंतन परंपरेचा दिव्य अनुभव घ्यावा, ही प्रेमपूर्वक विनंती.
२५ ऑक्टोबर २०२६ :- वाराणसी (काशी) येथे आगमन व सर्व यात्रेकरूंचे एकत्रीकरण. सायंकाळी नौकाविहाराद्वारे दशाश्वमेध घाटावरील भव्य गंगा आरतीचे दर्शन. काशी विश्वनाथ मंदिराचे दर्शन.
२६ ऑक्टोबर २०२६ :- काशी स्थळ दर्शन. पवित्र गंगास्नान. स्थानिक बाजारपेठेत खरेदीसाठी विशेष वेळ.
२७ ऑक्टोबर २०२६ :- तीर्थराज प्रयागराज येथे प्रस्थान, त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना व सरस्वती यांच्या पवित्र संगमस्थळी) स्नान, दर्शन, अक्षयवट, पाताळेश्वर मंदिर व मोठे हनुमान मंदिराचे दर्शन. रात्री विश्राम अयोध्या.
२८ ऑक्टोबर २०२६ :- अयोध्या दर्शन, रात्री विश्राम नैमिषारण्य.
२९ ऑक्टोबर २०२६ :- पवित्र कलशयात्रा, श्रीमद्भागवत कथेचा विधिवत शुभारंभ.
३० ऑक्टोबर २०२६ :- श्रीमद्भागवत कथेचा द्वितीय दिवस. नैमिषारण्यातील पवित्र तीर्थस्थळांचे दर्शन.
३१ ऑक्टोबर २०२६ :- श्रीमद्भागवत कथेचा तृतीय दिवस, नैमिषारण्याच्या पवित्र ८४ कोस परिक्रमेची सुरुवात.
१ नोव्हेंबर २०२६ :- श्रीमद्भागवत कथेचा चतुर्थ दिवस. नैमिषारण्याच्या ८४ कोस परिक्रमेचा दूसरा दिवस.
२ नोव्हेंबर २०२६ :- श्रीमद्भागवत कथेचा पाचवा दिवस. नैमिषारण्याच्या ८४ कोस परिक्रमेचा तृतीय दिवस.
३ नोव्हेंबर २०२६ :- श्रीमद्भागवत कथेचा सहावा दिवस. कथा दोन सत्रांमध्ये संपन्न होईल.
४ नोव्हेंबर २०२६ :- श्रीमद्भागवत कथेची सांगता, पवित्र हवन-यज्ञाचे आयोजन. दुपारी सुमारे १.०० वाजता कथा यात्रेची सांगता होऊन लखनौकडे प्रस्थान.
वाराणसी (काशी) :- दशाश्वमेध घाटावरील दिव्य माँ गंगा महाआरती दर्शन. नौकाविहाराद्वारे सुमारे १५ पवित्र गंगा घाटांचे दर्शन, काशी विश्वनाथ दर्शन, अन्नपूर्णा मंदिर, कालभैरव मंदिर, संकटमोचन हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर, कवडी माता मंदिर, तुलसी मानस मंदिर, बिर्ला मंदिर (बी.एच.यू. परिसर), भारत माता मंदिर यांचे दर्शन तसेच प्रसिद्ध बनारसी साडी खरेदीसाठी मुबलक वेळ.
प्रयागराज :- पवित्र त्रिवेणी संगमात स्नान, बडे हनुमान मंदिर, अक्षयवट आणि पाताळेश्वर मंदिर दर्शन.
अयोध्या :- श्री राम जन्मभूमी मंदिर, हनुमानगढी, सरयू घाट, कनक भवन, दशरथ महाल आणि सीता की रसोई दर्शन.
नैमिषारण्य:- चक्रतीर्थ, गोमती घाट, मनू–शतरूपा तपोभूमी, व्यास गादी, सूत गादी, ललिता देवी मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, हनुमानगढी, तिरुपती बालाजी मंदिर, पुराण मंदिर, नारदानंद आश्रम, आपा नारायण स्वामी आश्रम, बाबा विश्वनाथ मंदिर (छोटी काशी), मृत्युञ्जय सिद्धपीठ, कालीपीठ आश्रम तसेच इतर अनेक प्रमुख पवित्र तीर्थस्थळांचे दर्शन.
3 दिवसीय ८४ कोस परिक्रमेतील पवित्र स्थळे:- द्वारकाधीश मंदिर, दधीची कुंड, वराह कूप, कुम्नेश्वर, कुकरी तीर्थ, कोटी तीर्थ, सूर्यकुंड, कोटेश्वर महादेव, कैलास महादेव, प्रभाकर तीर्थ, हत्याहरण तीर्थ, धौतपाप तीर्थ, नर्मदेश्वर, तुम्बुरु नारायण, दश कन्या तीर्थ, सूर्यकुंड, हरिहर क्षेत्र, विष्णू आवर्त, रुद्रावर्त, तसेच अनेक अन्य प्राचीन व पूजनीय तीर्थस्थळांचे दर्शन.
काशी (वाराणसी) ते नैमिषारण्य हा प्रवास वातानुकूलित लक्झरी अर्बानिया द्वारे होईल.
नैमिषारण्याची तीन दिवसीय ८४ कोस परिक्रमा वातानुकूलित चारचाकी वाहन किंवा ए.सी. टेम्पो ट्रॅव्हलर द्वारे पूर्ण करण्यात येईल.
काशी, अयोध्या, नैमिषारण्य तसेच इतर तीर्थक्षेत्रांतील स्थानिक दर्शनासाठी रिक्षा व तत्सम स्थानिक वाहनांची व्यवस्था करण्यात येईल.
ज्या ठिकाणांपर्यंत वाहनांना जाण्याची परवानगी असेल, वाहन तिथपर्यन्तच जातिल .
यात्रेकरूंनी दररोज साधारणतः 1 ते 1.5 किलोमीटर चालण्याची शारीरिक व मानसिक तयारी करून यावे.
काशी विश्वनाथांचे दर्शन झाल्यानंतर हॉटेलमध्ये परतण्याची व्यवस्था यात्रेकरूंनी स्वतः करावी.
अयोध्या, काशी तसेच इतर तीर्थक्षेत्रांतील मंदिरांमध्ये व्हीलचेअर, शीघ्र दर्शन अथवा विशेष दर्शन यांसारख्या सुविधांसाठी होणारा खर्च यात्रेकरूंना स्वतः करावा .
संपूर्ण यात्रा व श्रीमद्भागवत कथा कालावधीत यात्रेकरूंना अटेच सुविधा गृह युक्त ए सी डबल बेड रूम, मध्ये दोन भक्तांच्या निवासाची व्यवस्था करण्यात येईल.
कथा यात्रा सुरु होण्या अगोदर काशी (वाराणसी) येथे तसेच कथा यात्रा समाप्तीनंतर नैमिषारण्य किंवा लखनौ येथे वास्तव्याचा संपूर्ण खर्च यात्रेकरूंनी स्वतः करावयाचा आहे.
पहिल्या मजल्यापर्यंत चढण्याची तयारी असावी.
श्रीमद्भागवत कथा कालावधीत दररोज बालकृष्ण भगवानांचे षोडशोपचार पूजन केले जाईल. प्रत्येक भक्त हे पूजन स्वतःच्या हस्ते वैयक्तिक रित्या करेल.
कथा काळात पूजनासाठी आवश्यक सर्व पूजन सामग्री आयोजकां तर्फे दिली जाईल.
प्रत्येक भक्त वैयक्तिकरित्या अथवा पती-पत्नी जोडप्याने बालकृष्ण भगवानांचे पूजन करू शकतो. त्यामुळे कथा यात्रेला येताना आपल्या घरातील बालकृष्णाची मूर्ती सोबत आणावी.
एका जोडप्यात एक मूर्ती चालेल.
कथा, पूजन हवन व इतर धार्मिक विधींमध्ये सहभागी होताना स्त्री-पुरुषांनी भारतीय पारंपरिक वेशभूषा परिधान करणे अनिवार्य आहे.
कथा, षोडशोपचार पूजन, हवन व इतर धार्मिक विधींमध्ये सहभागी होण्यासाठी यात्रा शुल्काव्यतिरिक्त प्रति व्यक्ती ₹२,१०१/- दक्षिणा द्यावी लागेल.
संपूर्ण यात्रा कालावधीत दिवसातून दोन वेळा शुद्ध, सात्त्विक (शाकाहारी) व स्वादिष्ट भोजन तसेच वेळेनुसार गोड पदार्थांची व्यवस्था करण्यात येईल.
७ दिवसीय कथा कालावधीत जेवणात कांदा व लसूण यांचा वापर केला जाणार नाही.
दररोज सकाळी नाश्ता (बालभोग) तसेच दिवसातून दोन वेळा व्हेंडिंग मशीनद्वारे चहा/कॉफीची व्यवस्था उपलब्ध असेल.
एकादशी व संकष्टी चतुर्थी या दिवशी उपवासासाठी फराळाची व्यवस्था करण्यात येईल.
वैयक्तिक साप्ताहिक उपवासा ची व्यवस्था होणार नाही.
उपवासाच्या दिवशी सकाळचा नाश्ता दिला जाणार नाही.
भोजन व्यवस्था वेळेवर होण्यासाठी स्वतंत्र पॅन्ट्री वाहनाची सोय आहे.
संपूर्ण प्रवासादरम्यान प्रत्येक यात्रेकरूस दररोज २ लिटर आर.ओ. शुद्ध बाटलीबंद पिण्याचे पाणी उपलब्ध करून दिले जाईल.
कथा कालावधीत आर.ओ. शुद्ध पिण्याच्या पाण्याची व्यवस्था उपलब्ध असेल.
यात्रेचा मनमुराद आनंद घेण्यासाठी शक्य तितके कमी सामान घेऊन प्रवास करावा.
प्रत्येक व्यक्तीस फक्त एक मोठी सूटकेस किंवा बॅग (कमाल १८ किलो वजनाची) आणण्याची परवानगी असेल. तिच्या वाहतुकीची व्यवस्था सेवका द्वारे होईल.
अतिरिक्त सामानाची जबाबदारी व वाहतूक संबंधित यात्रेकरूंनी स्वतः करावी.
मौल्यवान दागिने व इतर मौल्यवान वस्तू स्वतःच्या जबाबदारीवर आणाव्यात.
प्रत्येक यात्रेकरूने स्वतःच्या प्रकृतीची व पथ्याची योग्य काळजी घ्यावी.
नियमित औषधांचा पुरेश्या प्रमाणात सोबत ठेवावा.
प्राथमिक उपचारांची सुविधा उपलब्ध असेल. मात्र, गंभीर आरोग्यविषयक अडचण उद्भवल्यास संबंधित यात्रेकरूच्या कुटुंबीयांना कळवून योग्य तो निर्णय घेण्यात येईल.
यात्रेच्या प्रारंभी प्रत्येक यात्रेकरूकडे वैध शासकीय ओळखपत्र (उदा. आधार कार्ड इत्यादी) असणे आवश्यक आहे.
एक पासपोर्ट आकाराचा फोटो सोबत आणावा.
घाटांवर स्नान करताना सर्व सुरक्षा सूचनांचे काटेकोरपणे पालन करावे.
अपरिहार्य परिस्थिती उद्भवल्यास आयोजकांना कार्यक्रमात आवश्यक बदल करण्याचा अधिकार राहील.
कथा यात्रा सुरु होण्याचा १५ दिवसांपूर्वी WhatsApp समूह तयार करण्यात येईल. त्याद्वारे यात्रेसंबंधी अधिक सविस्तर माहिती देण्यात येईल.
या यात्रेसंबंधी उद्भवणारे सर्व वाद बडवाह (Barwaha) येथील न्यायक्षेत्राच्या अधीन राहतील.
यात्रा राशित प्रवास, भोजन, निवास, पूजन साहित्य आणि स्थानिक दर्शनाची सर्व व्यवस्था समाविष्ट आहे (काशी विश्वनाथ मंदिराहून परतीच्या व्यवस्थेचा अपवाद वगळता).
आरक्षण निश्चित करण्यासाठी प्रति व्यक्ती ₹१५,००० रक्कम नोंदणीच्या वेळी जमा करावी.
आपल्या निवडलेल्या यात्रेच्या किमान ६० दिवस आधी प्रति व्यक्ती आणखी ₹१५,००० जमा करणे आवश्यक आहे.
उर्वरित रक्कम यात्रा सुरु होण्याच्या दिवशी जमा करावी.
वाराणसी येथे येण्याचा आणि लखनौहून परतीचा प्रवासखर्च यात्रेकरूंनी स्वत: करावयाचा आहे.
बुकिंग रक्कम जमा केल्यावर, यात्रेकरूला सर्व सुविधा, अटी व नियम यांची संपूर्ण माहिती असून ते त्यास मान्य आहेत, असे गृहीत धरले जाईल.
कृपया कोणत्याही प्रकारची सवलत, सूट अथवा विशेष दरकपातीची विनंती किंवा चर्चा करू नये, ही नम्र विनंती.
आपण निवडलेल्या यात्रेच्या प्रारंभ तारखेच्या ९० दिवस किंवा त्यापूर्वी आरक्षण रद्द केल्यास, प्रति व्यक्ती ₹३,००० रक्कम वजा करून उर्वरित रक्कम परत केली जाईल.
यात्रा सुरू होण्याच्या ६० ते ९० दिवसांदरम्यान आरक्षण रद्द केल्यास, प्रति व्यक्ती ₹१०,००० रक्कम वजा करून उर्वरित रक्कम परत केली जाईल.
यात्रा सुरू होण्याच्या ३० ते ५९ दिवसांदरम्यान आरक्षण रद्द केल्यास, एकूण यात्रा शुल्कातून प्रति व्यक्ती ₹१५,००० रक्कम वजा करून उर्वरित रक्कम परत केली जाईल.
यात्रा सुरू होण्याच्या ३० दिवसांच्या आत आरक्षण रद्द केल्यास, कोणत्याही प्रकारचा परतावा (Refund) दिला जाणार नाही.
निर्धारित मुदतीत यात्रेची उर्वरित रक्कम भरली नाही, तर संबंधित आरक्षण आपोआप रद्द समजले जाईल आणि लागू असलेल्या कपातीनंतर परतावा या धोरणानुसार करण्यात येईल.
यात्रा सुरू झाल्यानंतर कोणत्याही कारणास्तव प्रवासी मधेच यात्रा सोडून गेल्यास, कोणताही परतावा दिला जाणार नाही.
अपरिहार्य कारणास्तव यात्रा करू शकत नसल्यास, आपल्या ऐवजी दुसऱ्या व्यक्तीस यात्रेत सहभागी करता येईल.
रद्द केलेल्या आरक्षणाची रक्कम इतर कोणत्याही यात्रेच्या शुल्कात समायोजित (Adjust) होणार नाही.
लॉकडाऊन, संचारबंदी, युद्धजन्य परिस्थिती, नैसर्गिक आपत्ती किंवा शासकीय निर्बंध ह्यामुळे यात्रा रद्द झाल्यास, भरलेली रक्कम परत केली जाणार नाही; मात्र ती आयोजकांच्या भविष्यातील कोणत्याही यात्रेत समायोजित केली जाईल.
सध्याच्या जागतिक युद्धजन्य परिस्थितीचा विचार करून, डिझेल किंवा इंधनाच्या किमतींमध्ये अनपेक्षित वाढ झाल्यास, यात्रा शुल्कात अंशतः वाढ लागू होऊ शकते.
कृपया हे आरक्षण व निरस्तीकरण प्रक्रिया काळजीपूर्वक वाचावे. या धोरणाची अंमलबजावणी काटेकोरपणे करण्यात येईल आणि त्यानंतर कोणत्याही प्रकारच्या तक्रारी किंवा हरकती ग्राह्य धरल्या जाणार नाहीत.